तेलंगाना के वित्त मंत्री हरीश राव ने केंद्र सरकार पर धान खरीद लक्ष्य को गुपचुप तरीके से घटाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि इससे किसानों पर बुरा असर पड़ेगा और सरकार को खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही दिखानी चाहिए।
तेलंगाना के वित्त मंत्री हरीश राव ने केंद्र सरकार पर धान खरीद लक्ष्य को गुपचुप तरीके से घटाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि इससे किसानों पर बुरा असर पड़ेगा और सरकार को खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही दिखानी चाहिए।

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तेलंगाना के वित्त मंत्री टी. हरीश राव ने केंद्र सरकार पर धान खरीद लक्ष्य को चुपचाप घटाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह कदम उन किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर निर्भर हैं। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, राव ने दावा किया कि यह फैसला बिना किसी उचित सलाह-मशवरे और पारदर्शिता के लिया जा रहा है, जिससे किसानों की स्थिति और खराब हो सकती है।
हरीश राव ने कहा कि तेलंगाना और अन्य राज्यों के लाखों किसानों के लिए धान की खेती जीवनरेखा है। ऐसे में खरीद लक्ष्य में कटौती से किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे और सुनिश्चित करे कि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने कहा, "सरकार को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए और किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभानी चाहिए। ऐसे फैसले राज्य सरकारों और अन्य संबंधित पक्षों से सलाह-मशवरे के बाद ही लिए जाने चाहिए।"
मंत्री ने खरीद प्रक्रिया में अधिक जवाबदेही और स्पष्टता की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होने से बचने के लिए सरकार को साफ-सुथरी जानकारी देनी चाहिए। राव की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कृषि नीतियों और ग्रामीण जीवन पर उनके प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ रही है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज हो गई है, और विपक्षी पार्टियां केंद्र सरकार की कृषि खरीद नीति की आलोचना कर रही हैं।
फिलहाल, केंद्र सरकार ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। किसान और कृषि विशेषज्ञ इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि खरीद नीति में किसी भी बदलाव का व्यापक असर हो सकता है।